१ असंभावित मौन से निकलकर बारिश की टपटप में घुलना है । चुपचाप भीगी हरी घास पर चलना है मन के सारे कलुष को इस बारिश में धुलना है
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!