जब सबकुछ प्रतिकूल नजर आए प्रंशसा - निंदा का धुँआ दर्पण को ढ़क जाए नियति भाग्य विश्वास की परीक्षा लेने आए तब जीत किसकी होगी ? सदैव तुम्हारी हे मेरे पथिक ! तुम्हारे संकल्प की , अपलक मुस्कान की न रुकने का साहस , स्वीकार्य का सामर्थ्य तुलाओं के उत्तोलन से बाहर