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थामा के जीवन की डोर

थामा के जीवन की डोर

तू  ही  बता  अब  मैं  कहा  जाऊँ थामा  के  जीवन  की  डोर  तूझे   अब  मैं   चिर  विश्राम  को  पाऊँ माता  के  आँचल  की  ओर पिता  के  दुलारे  की  ओर खिलखिलाते  बचपन  की  ओर चिर  स्वस्थ  तन  - मन  की  कोर दयालु  स्नेह  सहभावी  सुकुमार प्रेम  की   मजबूती  की  गठजोड़

हे मेरे पथिक !

जब  सबकुछ  प्रतिकूल  नजर  आए  प्रंशसा - निंदा  का   धुँआ  दर्पण  को  ढ़क  जाए  नियति  भाग्य   विश्वास  की  परीक्षा  लेने  आए  तब  जीत  किसकी  होगी  ?  सदैव  तुम्हारी   हे  मेरे  पथिक  !    तुम्हारे   संकल्प  की  , अपलक  मुस्कान  की न   रुकने   का   साहस  ,  स्वीकार्य   का  सामर्थ्य  तुलाओं   के   उत्तोलन   से   बाहर

संजीवन गुलाब

 नव  पल्लव  से  खिलते  संजीवन  गुलाब  दुपहरिया  की   दुकुल  ओढ़े  खुशियाँ  बिखेरते किसी  की  खाली  झोली  में  खुशबू  और रंग  घोलते सड़क  के   किसी   किनारे  ,  झाड़ - झाखंड  में  संजीवन  गुलाब  ।