बारिश ने जोर पकड़ा हुआ है हम अपने घर में है बाहर सड़कें गढ्ढों से भरी है पन्नी - प्लास्टिक से नाला जाम है पुलों के नीचें रैन बसेरे है कई मासूम अकेले है माता परेशान है फिर भी मजबूत बनी हुई है
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!