सर्द दिनों की रुहानी आहट लिए मौसम का रुख बदला है सिमटा - सिमटा दिन गुलाबी ठंडक लिए सूरज आसमाँ के पट पर खिलने लगे गुलाब मंजरी पर पुलकित पुष्प
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द शनिवार 07 फरवरी, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत खूब।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंआप सबका स्वागत और हृदय से धन्यवाद 🙏 प्रणाम सादर ।
जवाब देंहटाएंचाय की प्याली और हँसी का जो जादू आपने दिखाया है, वो इतनी सहज और प्राकृतिक लगती है कि खुद को उसमें खोते हुए महसूस करता हूँ। जिंदगी की भागदौड़ और जिम्मेदारियों के बीच भी एक स्त्री की हँसी को इतनी खूबसूरती से बयां करना कमाल है।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद 🙏😊
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