सर्द दिनों की रुहानी आहट लिए मौसम का रुख बदला है सिमटा - सिमटा दिन गुलाबी ठंडक लिए सूरज आसमाँ के पट पर खिलने लगे गुलाब मंजरी पर पुलकित पुष्प
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!
मेरी माँ रेनू के स्नेहिल आँचल की छाँव तले ..!
बहुत सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंधन्यवाद भारती जी ।
जवाब देंहटाएंWahhh
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