चिरागों की रोशनी में जलते
तिल - तिल लौ की चुनर में
तब यथार्थ को जगह मिलती है
स्वप्नों कों पायदान मिलता है
सपनों की दुशाला सींती
हकीकत राही से संघर्ष मांगती
चाह की ललक आजमाती
अहं पर सौ - सौ चोट करती
गिरती - उठती लहरों में
रेत के भवनों में
पथ की आस्था में विश्वास की परीक्षा लेती
कदम - कदम पर जिंदगी को गढ़ती रहती

बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शुक्रवार 06 नवंबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
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